लाखौड़ी, औंडी, पंचूर व खैरासैंण में चकबंदी समितियों के गठन लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्य नहीं

लाखौड़ी, औंडी, पंचूर व खैरासैंण में चकबंदी समितियों के गठन लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्य नहीं

14th पोस्ट ………….1985 के बाद की फ़ाइल के पन्नों से…….. (गतांक 5 अप्रेल’ 2019 की 13th पोस्ट से आगे) इन्हें पाठकों की सुविधा हेतु यहाँ भी Link के साथ कापी पेस्ट किया जा रहा है ताकि भविष्य में फेसबुक से डिलेट होने की स्थिति में ये आने वाली पीढ़ियों के लिए इस वेबसाइट पर सुरक्षित रहें.बागवानी/चकबंदी पर 1985 के बाद की फ़ाइल के पन्नों से…..देखें

इधर नवम्बर 2017 से लगतार ये भी समाचार थे कि चकबंदी स्टाफ रूडकी द्वारा गढवाल मंडल के गाँव पंचूर तथा खैरासैंण के लिए शासनादेश जारी किये गये हैं जिन्हें देखते हुए गरीब क्रान्ति अभियान की टीम ने 23 जून 2018 को इन गाँवों में भ्रमण के दौरान पाया कि जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं हुवा है !!! पुन: 27 जून के समाचार के क्रम में कि लाखौड़ी, औंडी, पंचूर व खैरासैंण में चकबंदी समितियों के गठन के सांथ ही खाता-खतौनियों का सत्यापन कर लिया गया है, इस सम्बन्ध में भी पत्र दि० 23 जुलाई के द्वारा RTI के तहत ज्ञात हुवा है कि इन गाँवों में बैठकों के दौरान अगस्त-सितम्बर 2017 से भूमिधरों को मात्र बताया ही जा रहा है कि, उत्तरप्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम 1953 को उत्तराखंड के शासनादेश 9-11-17, 16-11-17, 1-12-17 एवं 26-2-18 के तहत उपरोक्त गावों में चकबंदी के लिए विज्ञप्ति जारी की गयी है. जो निम्न प्रकार हैं…

“ धारा 4 (2) का प्रकाशन किया जा रहा है जिसके फलस्वरूप सरकारी गजट में विज्ञप्ति संख्या – उत्तराखंड राजस्व विभाग देहरादून के शासनादेश संख्या – 766 /XVIII(III)/2017-04 (26)/2017 दि० 9-11-2017, शासनादेश संख्या – 821/XVIII (III)/217-04(26)/2017 TC- दि० 16-11-2017 एवं शासनादेश संख्या – 815 XVIII(III)?2017 04(26) 2017 दि० 1-12-2017 से प्राप्त अनुमति के अनुक्रम में उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम 1953 (उ०प्र०) अधिनियम संख्या 5 सन 1954 (उत्तराखंड में यथा प्रवृत) की धारा 4 की उपधारा (2) (क) आधीन सरकारी विज्ञप्ति संख्या 3741/ वी०एच०आई०ई०-454/53 दि० 21 नवम्बर 1963 द्वारा प्रतिनिहित अधिकारों का प्रयोग करके शासनादेश संख्या – 85/XVIII(3)/2018-04(26)2017 दि० 26-2-2018 की विज्ञप्ति जारी की गयी है. “

बैठकों में यह भी बताया गया है कि उक्त ग्रामों में अब बन्दोबस्त अधिकारी चकबंदी हरिद्वार स्थान रूडकी की अनुमति के बिना क्रय-विक्रय करना, पशुपालन, बृक्ष काटना, भट्टा खुदान आदि कोई भी प्रयोजन नहीं करेंगे और भूमि सम्बन्धी विवाद चाहे किसी भी अदालत में चल रहे हों स्थगित हो जायेंगे.

तत्पश्चात बैठक में उपस्थित ग्रामपंचायत के सदस्यों व भूमिधरों की समितियों का गठन करते हुए खतौनियों का सत्यापन आम सभा में पढ़ कर किया गया है आदि. ” (संलग्न- तूफानी दौरा गढ़वाल मंडल का, समाचारों की कटिंग्स, RTI से प्राप्त सूचनाएं 247 to 270 देखें). क्रमश: ….

केवला नन्द “फ़कीर”

उत्तराखंड चकबंदी मोर्चा

रानीखेत में 10 अप्रैल तथा 20 मई चकबंदी रैली के बाद मा० मुख्यमंत्री के लिए ज्ञापन

रानीखेत में 10 अप्रैल तथा 20 मई चकबंदी रैली के बाद मा० मुख्यमंत्री के लिए ज्ञापन

13th पोस्ट….. 1985 के बाद की फ़ाइल के पन्नों से…….. (गतांक 24 मार्च’ 2019 की 12th पोस्ट से आगे) इन्हें पाठकों की सुविधा हेतु यहाँ भी Link के साथ कापी पेस्ट किया जा रहा है ताकि भविष्य में फेसबुक से डिलेट होने की स्थिति में ये आने वाली पीढ़ियों के लिए इस वेबसाइट पर सुरक्षित रहें.बागवानी/चकबंदी पर 1985 के बाद की फ़ाइल के पन्नों से…..देखें

मित्रों,

जैसा 12th पोस्ट से ज्ञात है कि आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद, उत्तराखंड से RTI द्वारा सूचना मांगने पर हमें बताया है कि हमारे द्वारा यानि भूमिधरों द्वारा ग्रामसभा झलोड़ी में अभी स्वैच्छिक चकबंदी की योजना तैयार नहीं की गयी है…. इसलिए वहाँ चकबंदी का काम नहीं हो सकता…. आश्चर्यजनक ?

इसीक्रम में दि० 10 अप्रेल तथा 20 मई, 2018 को रानीखेत में भूमिधरों की रैली-धरना-प्रदर्शन के बाद मा० मुख्यमंत्री जी को पत्र द्वारा पुन: प्रार्थना की गयी है कि 2014 से तैयार उक्त दोनों गांवों में अनिवार्य/स्वैच्छिक/आंशिक जैसी भी चकबंदी संभव हो, उसे एक मॉडल के तौर पर तुरन्त कार्यान्वित किया जाय ताकि जमीनी स्तर पर इतना सब कुछ तैयार करने के बाद भी भूमिधर भ्रमित एवं निराश नाँ हों. (संग्लग्न रानीखेत में 10 अप्रेल तथा 20 मई चकबंदी रैली के बाद मा० मुख्यमंत्री के लिए ज्ञापन, समाचार पत्रों की कटिंग्स तथा रैली के फोटो 236 to 246 में देखते हुवे रैली का वीडिओ भी इस Link में देखें… क्रमश: ….

केवला नन्द “फ़कीर”

रानीखेत तहसील के गांवों में चकबंदी नहीं करने का बहाना कि भूमिधरों ने स्वैच्छिक चकबंदी योजना नहीं दी

रानीखेत तहसील के गांवों में चकबंदी नहीं करने का बहाना कि भूमिधरों ने स्वैच्छिक चकबंदी योजना नहीं दी

12th पोस्ट….. 1985 के बाद की फ़ाइल के पन्नों से….. (गतांक 15 मार्च’ 2019 की 11th पोस्ट से आगे) इन्हें पाठकों की सुविधा हेतु यहाँ भी Link के साथ कापी पेस्ट किया जा रहा है ताकि भविष्य में फेसबुक से डिलेट होने की स्थिति में ये आने वाली पीढ़ियों के लिए इस वेबसाइट पर सुरक्षित रहें.बागवानी/चकबंदी पर 1985 के बाद की फ़ाइल के पन्नों से…..देखें

मित्रों,

इधर अक्टूबर 2017 में बंदोबस्त अधिकारी, चकबंदी विभाग उधमसिंहनगर, रुद्रपुर के स्टाफ ने बताया कि उन्हें झलोड़ी गाँव में चकबंदी की वस्तुस्थिति की जानकारी लेने का आदेश हुवा है जिसमें उन्हें मेरा व्यक्तिगत सहयोग चाहिए. उन्होंने उक्त पत्र की प्रति मुझे दिखाई जो हमारे पत्र दि० 11 मई, 2017 के क्रम में आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद उख० से उनको निर्देशित था. तदनुसार 14 नवम्बर को उक्त चकबंदी टीम को स्वैच्छिक एवं आंशिक चकबंदी को तैयार गाँव झलोड़ी एवं कारचूली (रानीखेत) की दोनों जमीनों का निरिक्षण भूमिधरों की उपस्थिति में कराया गया.

लेकिन, एक माँह तक भी जब उक्त निरिक्षण की रिपोर्ट भूमिधरों को नहीं मिली तो भूमिधरों ने आ० अजय भट्ट जी, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा को दि० 27 दिसम्बर 2017 को खिरखेत प्राइमरी स्कूल के सताब्दी समारोह में एक ज्ञापन दिया लेकिन उस पर भी जब कोई कार्यवाही नहीं हुई तो भूमिधरों ने आ० करन महरा मा० विधायक एवं उप-नेता प्रतिपक्ष के द्वारा भी रिपोर्ट मांगी लेकिन आश्चर्य की बात है कि उनके पत्र का भी कोई जबाब नहीं मिलने पर 28-4-2018 को आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद, उत्तराखंड से RTI द्वारा सूचना मांगने पर ज्ञात हुवा कि,

“ हमारे द्वारा यानि भूमिधरों द्वारा ग्रामसभा झलोड़ी में अभी स्वैच्छिक चकबंदी की योजना तैयार नहीं की गयी है ”.

वाह: रे हमारे उत्तराखंड के जनप्रतिनिधियों की सरकार तथा उनके विभाग ??? शायद इसी को कहते हैं “खोदा पहाड़ निकली चुहिया” !!!

2014 से तैयार भूमिधरों को ही यदि अपने गाँव की स्वैच्छिक चकबंदी योजना भी स्वयं बनानी थी तो फिर उत्तराखंड सरकार तथा उनका चकबंदी विभाग किसलिए है ? इनसे नहीं होता है तो स्पष्ट कहें…. लेकिन इन्होंने आजादी बाद के 70 सालों से इसी नीति में पहाड़ एवं यहाँ के स्थानीय निवासियों को तबाह कर दिया है…

अत: इन बुनियादी समस्याओं को अब यों ही छोड़ा नहीं जाना चाहिए…. अत: इस पर भी हम आगे चर्चा करेंगे. संलग्न पत्रों को क्रमवार 224 to 235 में देखें. क्रमश: ….

केवला नन्द “फ़कीर”

चकबंदी हेतु मा० मंत्री जी के साथ दूसरी बैठक

चकबंदी हेतु मा० मंत्री जी के साथ दूसरी बैठक

11th पोस्ट….. 1985 के बाद की फ़ाइल के पन्नों से…….. (गतांक 2-3-2019 की 10th पोस्ट से आगे) इन्हें पाठकों की सुविधा हेतु यहाँ भी Link के साथ कापी पेस्ट किया जा रहा है ताकि भविष्य में फेसबुक से डिलेट होने की स्थिति में ये आने वाली पीढ़ियों के लिए इस वेबसाइट पर सुरक्षित रहें.बागवानी/चकबंदी पर 1985 के बाद की फ़ाइल के पन्नों से…..देखें

मित्रों,

मा० कृषि-उद्यान मन्त्री जी के सांथ 3 अप्रेल 2017 की बैठक के बाद मा० मन्त्री जी की अध्यक्षता में चकबंदी की नयीं समिति का गठन किया गया जिसकी 28 अगस्त 2017 को देहरादून में बैठक हुई जिसमें ग्रामसभा झलोड़ी में स्वैच्छिक चकबंदी पर पुन: पत्र-तथ्यों के सांथ चर्चा हुई तथा “आंशिक चकबंदी हेतु” भी ग्रामसभा कारचूली/रानीखेत के अंतर्गत ग्राम भटोड़िया के लगभग 50 परिवारों की लगभग 322 नाली भूमि जो एक अलग टुकड़े में है, उसके लिए भी भूमिधरों की सहमति उन्हीं के 8 (आठ) बिन्दुओं की नियमावालीनुसार इसके 4 (चार) मुख्य दादा/परदादाओं के नाम की अलग-अलग कुल भूमि निकाल कर चार चकों में बांटने हेतु ग्रामपंचायत का प्रस्ताव के सांथ जो पत्र दि० 20 जून 2017 के द्वारा सचिव राजस्व को भेजा गया था, इन सभी पत्र-तथ्यों को भी सभा में प्रस्तुत किया गया. इन्हें सराहते हुए गढ़वाल मंडल के कुछ गांवों को भी चयन करके तुरंत चकबंदी कार्य आरम्भ करने हेतु चकबंदी की नियमावली तथा अधिनियम के पुनरावलोकन आदि पर चर्चा के उपरान्त एक कार्यवृत्त तैयार किया गया, किन्तु ये सब आज डेढ़ वर्ष बाद भी बिचारणीय ही हैं ? (संग्लग्न आंशिक चकबंदी के पत्र एवं बैठक का कार्यवृत्त 216 to 223 देखें). क्रमश: ….

केवला नन्द “फकीर”

नियमावली एवं विभागीय ढांचे हेतु शासन-प्रशासन गंभीर नहीं

नियमावली एवं विभागीय ढांचे हेतु शासन-प्रशासन गंभीर नहीं

10th पोस्ट….1985 के बाद की फ़ाइल के पन्नों से… (गतांक 25-2-2019 की 9th पोस्ट से आगे) इन्हें पाठकों की सुविधा हेतु यहाँ भी Link के साथ कापी पेस्ट किया जा रहा है ताकि भविष्य में फेसबुक से डिलेट होने की स्थिति में ये आने वाली पीढ़ियों के लिए इस वेबसाइट पर सुरक्षित रहें.बागवानी/चकबंदी पर 1985 के बाद की फ़ाइल के पन्नों से…..देखें

मित्रों,

इस सम्बन्ध का एक लंबा पत्राचार जो 1985 से उत्तरप्रदेश सरकार के सांथ चला था, अभी अपनी उत्तराखंडी सरकार के सांथ भी लगातार चलता ही आ रहा है जिसे चकबंदी शुभचिंतकों के आग्रह पर यहाँ क्रमवार दिया जा रहा है…

2014 से 2016 तक तीन वर्षों का 63 पन्नों का पत्राचार नयी सरकार को 31 मार्च 2017 के पत्र द्वारा वर्तमान मा० मुख्यमंत्री जी को देने के बाद 3 अप्रेल 2017 को चकबंदी समर्थकों संग पौड़ी जनपद निवासी आ० गरीब जी की अगुवाई में मा० कृषि-उद्यान मंत्री एवं अनेक सचिवों के सांथ देहरादून में बैठक हुई जिसमें उक्त झलोड़ी/रानीखेत चकबंदी मॉडल क्षेत्र के नक्शे-खसरे-मास्टरप्लान आदि जो स्वयं भूमिधरों ने अपने 8 (आठ) बिन्दुओं की नियमावलीनुसार तैयार की है, उनकी विस्तृत जानकारी सभा को दी गयी.

बैठक में तय हुवा कि चकबंदी की नियमावली तीन महीनों में बनाकर स्वैच्छिक चकबंदी को तैयार गांवों में अबिलम्ब कार्य किया जायेगा तथा जिन गाँवों में 10-15 परिवार भी चकबंदी को तैयार होंगे उन गाँवों में आंशिक चकबंदी भी की जायेगी !!! समाचारों की कटिंग देखें.

इससे प्रोत्साहित होकर युवाओं ने रानीखेत तहसील से झलोड़ी गाँव के भूमिधरों के रिकार्ड निकालने के सांथ-सांथ ग्रामसभा कारचूली अंदर गाँव भटोड़िया की भूमि में आंशिक चकबंदी हेतु ग्रामप्रधान से प्रस्ताव व अलग-अलग परिवारों की भूमि का विवरण भी निकाला गया. DM महोदय एवं संबंधितों से भी वस्तुस्थितियों की जानकारी लेकर भूमिधरों को तैयार रहने के लिए कहा गया कि कभी भी चकबंदी टीम गाँव आकर स्वैच्छिक एवं आंशिक चकबंदी पर भी अपना काम शुरू कर सकती है !!! इन पत्रों के सांथ-सांथ 29-5-2017 को पौड़ी के जिला पंचायत भवन की बैठक जिसमें मा० कृष-उद्यान मंत्री जी ने अपनी उपस्थिति दी थी वहाँ से भी मा० मुख्यमंत्री जी को भेजे गये पत्रों को भी देखें.

लेकिन तीन महीनों तक जब न तो उक्त नियमावली पर कोई कार्यवाही हुई और न हमारे पत्र दि० 31-3-2017 (63 पन्नों वाला) पर कोई प्रतिक्रिया ही मिली, तो मजबूर होकर 9 जुलाय 2017 के पत्र द्वारा प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय से सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत जब सूचना मांगी तो राजस्व विभाग के 26 जुलाय के पत्र द्वारा ज्ञात हुवा कि दो दिन पूर्व यानि 24 जुलाई को चकबंदी की नियमावली के प्रारूप पर जिज्ञासा मात्र की है जबकि बैठक के निर्णयोंनुसार इसे काफी पहले बन जाना चाहिए था… तथा विभागीय ढांचा आदि से सम्बंधित उप्र० शासन के 40-50 पृष्टों के अलग-अलग गजट भी हमें दिए गये हैं ???

इस पर पुन: 22 अगस्त को अपील करने के बाद 11 सितम्बर की सुनवाई में कुछ पत्र-तथ्य तो मिले किन्तु विभागीय ढाँचे के बारे में प्रभारी सचिव उत्तराखंड शासन ने अपने पत्र 30 मई 17 के द्वारा राजस्व विभाग उप्र० शासन लखनऊ को कहा है कि यहाँ 471 पद सृजित हैं जिनमें से 177 पदों को उप्र० से लिया जाएगा और इधर आनन-फानन में चकबंदी के लिए कभी 228 पोस्टों की तो कभी 707 पोस्टों की भर्ती होने के समाचार भी निकाल दिए गये… !!!

अत: इन सारे पत्र-तथ्यों को देखने से यही प्रतीत होता है कि उत्तराखंड शासन-प्रशासन;

1- चकबंदी का अधिनियम बनने के बाबजूद भी उसकी नियमावली एवं विभागीय ढाँचे आदि के लिए गंभीर नहीं है?

2- शासनादेशों के बाबजूद भी ग्रामपंचायतों में चकबंदी पर चर्चा कराके लोगों को तैयार कराने के बजाय ग्रामप्रधानों से चकबंदी विरोधी/नकारात्मक प्रस्ताव लेकर अपनी जुम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहा है.

जबकि जिला, ब्लाक एवं ग्राम पंचायतों की बैठकों के एजेंडों में भूमिधरों को चकबंदी की जानकारियाँ देकर उन्हें तैयार करने के स्पष्ट आदेश हुए हैं? (9th पोस्ट में RTI द्वारा लगभग 200 ग्रामप्रधानों से चकबंदी के बिरोधी प्रस्ताव इसकी पुष्टि करते हैं)

संलग्न… सम्बंधित पत्र, RTI के तहत प्राप्त सूचनायें आदि 185 to 215 देखें. (यहाँ कुछ विशेष पत्र ही दिए जा रहे हैं पूर्ण जानकारी के ईच्छुक पूरी फ़ाइल देख सकते हैं) क्रमश: …

केवला नन्द “फकीर”

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