10th पोस्ट….1985 के बाद की फ़ाइल के पन्नों से… (गतांक 25-2-2019 की 9th पोस्ट से आगे) इन्हें पाठकों की सुविधा हेतु यहाँ भी Link के साथ कापी पेस्ट किया जा रहा है ताकि भविष्य में फेसबुक से डिलेट होने की स्थिति में ये आने वाली पीढ़ियों के लिए इस वेबसाइट पर सुरक्षित रहें.बागवानी/चकबंदी पर 1985 के बाद की फ़ाइल के पन्नों से…..देखें
मित्रों,
इस सम्बन्ध का एक लंबा पत्राचार जो 1985 से उत्तरप्रदेश सरकार के सांथ चला था, अभी अपनी उत्तराखंडी सरकार के सांथ भी लगातार चलता ही आ रहा है जिसे चकबंदी शुभचिंतकों के आग्रह पर यहाँ क्रमवार दिया जा रहा है…
2014 से 2016 तक तीन वर्षों का 63 पन्नों का पत्राचार नयी सरकार को 31 मार्च 2017 के पत्र द्वारा वर्तमान मा० मुख्यमंत्री जी को देने के बाद 3 अप्रेल 2017 को चकबंदी समर्थकों संग पौड़ी जनपद निवासी आ० गरीब जी की अगुवाई में मा० कृषि-उद्यान मंत्री एवं अनेक सचिवों के सांथ देहरादून में बैठक हुई जिसमें उक्त झलोड़ी/रानीखेत चकबंदी मॉडल क्षेत्र के नक्शे-खसरे-मास्टरप्लान आदि जो स्वयं भूमिधरों ने अपने 8 (आठ) बिन्दुओं की नियमावलीनुसार तैयार की है, उनकी विस्तृत जानकारी सभा को दी गयी.
बैठक में तय हुवा कि चकबंदी की नियमावली तीन महीनों में बनाकर स्वैच्छिक चकबंदी को तैयार गांवों में अबिलम्ब कार्य किया जायेगा तथा जिन गाँवों में 10-15 परिवार भी चकबंदी को तैयार होंगे उन गाँवों में आंशिक चकबंदी भी की जायेगी !!! समाचारों की कटिंग देखें.
इससे प्रोत्साहित होकर युवाओं ने रानीखेत तहसील से झलोड़ी गाँव के भूमिधरों के रिकार्ड निकालने के सांथ-सांथ ग्रामसभा कारचूली अंदर गाँव भटोड़िया की भूमि में आंशिक चकबंदी हेतु ग्रामप्रधान से प्रस्ताव व अलग-अलग परिवारों की भूमि का विवरण भी निकाला गया. DM महोदय एवं संबंधितों से भी वस्तुस्थितियों की जानकारी लेकर भूमिधरों को तैयार रहने के लिए कहा गया कि कभी भी चकबंदी टीम गाँव आकर स्वैच्छिक एवं आंशिक चकबंदी पर भी अपना काम शुरू कर सकती है !!! इन पत्रों के सांथ-सांथ 29-5-2017 को पौड़ी के जिला पंचायत भवन की बैठक जिसमें मा० कृष-उद्यान मंत्री जी ने अपनी उपस्थिति दी थी वहाँ से भी मा० मुख्यमंत्री जी को भेजे गये पत्रों को भी देखें.
लेकिन तीन महीनों तक जब न तो उक्त नियमावली पर कोई कार्यवाही हुई और न हमारे पत्र दि० 31-3-2017 (63 पन्नों वाला) पर कोई प्रतिक्रिया ही मिली, तो मजबूर होकर 9 जुलाय 2017 के पत्र द्वारा प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय से सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत जब सूचना मांगी तो राजस्व विभाग के 26 जुलाय के पत्र द्वारा ज्ञात हुवा कि दो दिन पूर्व यानि 24 जुलाई को चकबंदी की नियमावली के प्रारूप पर जिज्ञासा मात्र की है जबकि बैठक के निर्णयोंनुसार इसे काफी पहले बन जाना चाहिए था… तथा विभागीय ढांचा आदि से सम्बंधित उप्र० शासन के 40-50 पृष्टों के अलग-अलग गजट भी हमें दिए गये हैं ???
इस पर पुन: 22 अगस्त को अपील करने के बाद 11 सितम्बर की सुनवाई में कुछ पत्र-तथ्य तो मिले किन्तु विभागीय ढाँचे के बारे में प्रभारी सचिव उत्तराखंड शासन ने अपने पत्र 30 मई 17 के द्वारा राजस्व विभाग उप्र० शासन लखनऊ को कहा है कि यहाँ 471 पद सृजित हैं जिनमें से 177 पदों को उप्र० से लिया जाएगा और इधर आनन-फानन में चकबंदी के लिए कभी 228 पोस्टों की तो कभी 707 पोस्टों की भर्ती होने के समाचार भी निकाल दिए गये… !!!
अत: इन सारे पत्र-तथ्यों को देखने से यही प्रतीत होता है कि उत्तराखंड शासन-प्रशासन;
1- चकबंदी का अधिनियम बनने के बाबजूद भी उसकी नियमावली एवं विभागीय ढाँचे आदि के लिए गंभीर नहीं है?
2- शासनादेशों के बाबजूद भी ग्रामपंचायतों में चकबंदी पर चर्चा कराके लोगों को तैयार कराने के बजाय ग्रामप्रधानों से चकबंदी विरोधी/नकारात्मक प्रस्ताव लेकर अपनी जुम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहा है.
जबकि जिला, ब्लाक एवं ग्राम पंचायतों की बैठकों के एजेंडों में भूमिधरों को चकबंदी की जानकारियाँ देकर उन्हें तैयार करने के स्पष्ट आदेश हुए हैं? (9th पोस्ट में RTI द्वारा लगभग 200 ग्रामप्रधानों से चकबंदी के बिरोधी प्रस्ताव इसकी पुष्टि करते हैं)
संलग्न… सम्बंधित पत्र, RTI के तहत प्राप्त सूचनायें आदि 185 to 215 देखें. (यहाँ कुछ विशेष पत्र ही दिए जा रहे हैं पूर्ण जानकारी के ईच्छुक पूरी फ़ाइल देख सकते हैं) क्रमश: …
केवला नन्द “फकीर”






























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