चकबंदी हेतु कब कब, क्या क्या हुवा

Written by chakbandi

July 31, 2024

7th पोस्ट… 29 जनवरी 2019 (चकबंदी हेतु कब कब, क्या क्या हुवा) 1985 के बाद की फ़ाइल के पन्नों से….इन्हें पाठकों की सुविधा हेतु यहाँ भी Link के साथ कापी पेस्ट किया जा रहा है ताकि भविष्य में फेसबुक से डिलेट होने की स्थिति में ये आने वाली पीढ़ियों के लिए इस वेबसाइट पर सुरक्षित रहें.बागवानी/चकबंदी पर 1985 के बाद की फ़ाइल के पन्नों से…..देखें

मित्रों,

जैसा 20 जनवरी 2019 की 6th post से स्पष्ट है कि तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने पर्वतीय ग्रामीण क्षेत्र की आर्थिकी के लिए आजादी के बाद से ही न तो कोई टिकाऊ योजना दी, न कास्तकारों द्वारा खुद उगाये-पाले-पोषे गये फल-पौंधों की लागत मेहनत ही उनको दी और न उनके विखरे खेतों की बंदोबस्ती-चकबंदी करने के आदेशों का पालन हुवा. यही स्थितियां स्वास्थ, शिक्षा, व्यवसाय आदि क्षेत्रों में भी थी जिन्हें अनेक कर्मठ एवं जुझारू लोगों ने अपनी जान की बाजी लगाकर, शहादतें देकर अंतत: 2000 में पृथक राज्य की अवधारणा को साकार किया !!!

इधर पृथक राज्य उत्तराखंड बनने के बाद आशायें थी कि हमारे पडौसी राज्य हिमांचल प्रदेश की तर्ज पर यहाँ भी भूमिबंदोबस्ती-चकबंदी करके गाँवों से ही अर्थव्यवस्था के सांथ-सांथ स्वास्थ, शिक्षा एवं व्यवसायिक आयामों को भी सुद्रढ़ किया जायेगा. लेकिन हमारे जनप्रतिनिधियों ने गांवों के विकास की रीढ़ “चकबंदी” के नाम पर कब-कब क्या-क्या किया ये भी देखें :-

1- 2001-2002 – अपनी उत्तराखंडी सरकार, भाजपा के शासन में चकबंदी का निर्णय लिया गया तथा चकबंदी का प्रारूप बनाने के लिए हाईपावर कमेटी भी गठित की गई जिसमें गणेश सिंह “गरीब” जी को भी इसका सदस्य बनाया गया था, लेकिन काम नहीं हुवा.

2- 2004 – श्री नारायण दत्त तिवारी जी की सरकार में भी श्री पूरन सिंह डंगवाल जी की अध्यक्षता में भूमि सुधार परिषद का गठन हुवा. इस दौरान ताडीखेत ब्लाक की सगनेटी न्याय पंचायत तथा कल्जीखाल ब्लाक की दिवई न्याय पंचायत में अनेक बैठकें करके कार्यवाही को आगे बढ़ाने के प्रयास किये गए किन्तु फिर भी प्रारूप को अंतिम रूप नहीं दिया गया.

3- 2009 – इधर भी तत्कालीन मा० कृषि-उद्यान मंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी (वर्तमान मा० मुख्यमंत्री जी) की अध्यक्षता में पुन: सलाहकार समिति बनाई गई उसमें भी दिखावे की खाना पूर्ती करके लाखों रुपयों को स्वाहा: किया गया, किन्तु यहाँ भी काम कुछ नहीं हुवा.

4- 2012 – इस समय में भूमिधरों का दबाव तेज होने के कारण मुख्य मन्त्री श्री विजय बहुगुणा जी द्वारा अनिवार्य चकबंदी का निर्णय लिया गया तथा 3 (तीन) मन्त्रियों की एक कमेटी भी बनाई गई किन्तु तब भी कुछ नहीं हुवा.

तो क्या हमारी पृथक राज्य की अवधारणा यही थी ???

(हार्टिकल्चर टेक्नोलॉजी मिशन पर मा० मुख्यमंत्री श्री नारायण दत्त तिवारी जी को पत्र, वर्तमान मा० मुख्यमंत्री जी द्वारा तत्कालीन मा० कृषि-उद्यान मंत्री के समय के कुछ पत्र-तथ्य आदि संलग्न… 90 to 98 देखें) क्रमश: ……

केवला नन्द “फकीर”

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