अल्मोड़ा व पौड़ी में चकबंदी के आदेश

3rd post 19 दिसम्बर 2018 बागवानी/चकबंदी पर 1985 के बाद की फ़ाइल के पन्नों से….इन्हें पाठकों की सुविधा हेतु यहाँ भी Link के साथ कापी पेस्ट किया जा रहा है ताकि भविष्य में फेसबुक से डिलेट होने की स्थिति में ये आने वाली पीढ़ियों के लिए इस वेबसाइट पर सुरक्षित रहें.बागवानी/चकबंदी पर 1985 के बाद की फ़ाइल के पन्नों से…..देखें :

मित्रों,

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में कृषिभूमि की सही व्यवस्था (बंदोबस्ती-चकबंदी) न होने से भूमिधरों का पलायन ऐसा बढ़ा कि गाँवों में खेत बंजर, घर खंडर व बानर-सुवर-बाघों का आतंक तथा शिक्षा-स्वास्थचिकित्सा-व्यवसाय चरमराने से हजारों गाँव भूतिया हो चुके हैं… अत: पहाड़ विकास के लिए,

कृषिभूमि की चकबंदी तुरंत कराए सरकार नहीं तो न्यायालय के लिए हो जाओ तैयार…

जैसा 2nd पोस्ट के पत्रों से स्पष्ट है कि “कास्तकार महिलाओं की अपनी योजना” को जनपद अल्मोड़ा के ताडीखेत ब्लाक की अन्य ग्रामसभाओं में भी तुरंत लागू कराये जाने हेतु क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों व गणमान्यों का एक शिष्टमंडल दल तत्कालीन मा० पर्वतीय विकास मंत्री उ०प्र०, श्रीमान गोविन्द सिंह महरा जी के रानीखेत निवास पर 9-9-1989 को एक ज्ञापन के सांथ मिला. योजना जो महिलाओं की दिनचर्याओं पर आधारित थी, चर्चा के दौरान यह स्पष्ट हुवा कि भूमिधरों को उनके विखरे खेतों की कुल भूमि एक सांथ चकों में मिलते ही यह योजना बागवानी के क्षेत्र में अवश्य ही क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगी जैसा कि निदेशक उद्यान ने भी अपने पत्र में कहा है. इस पर मा० मंत्री जी ने प्रशन्नता व्यक्त करते हुए आश्वासन दिया कि भूमिबंदोबस्ती-चकबंदी के लिए वे स्वयं लखनऊ से तुरंत कार्यवाही करायेंगे. (इस पर लखनऊ में 27-9-1989 को राजस्व परिषद तथा चकबंदी विभाग उ०प्र० की बैठक हुई जिसमें अल्मोड़ा व पौड़ी में चकबंदी के कार्यालय खोलने का निर्णय हुवा….. इस पर आगे चर्चा करेंगे).

माननीय के सांथ इस बैठक में यह भी तय हुवा कि “भूमिबंदोबस्ती-चकबंदी होने तक झलोड़ी गाँव में इस योजना का एक मॉडल सूखा राहत योजना Dry Proon Area Programe (DPAP) के तहत तैयार किया जाय”. जिसके लिए पुन: अध्यक्ष, ग्राम विकास परिषद, खिरखेत द्वारा निदेशक उद्यान को प्रार्थना की गई जिस पर उनके द्वारा जिलाधिकारी से आग्रह किया गया कि उक्त कार्य को DPAP के तहत संपादित कराया जाय.

तत्पश्चात स्थानीय उपायुक्त रानीखेत से प्रार्थना की गई जिसके चलते उन्होंने एक निचित दिन में अपने ही कार्यालय में जिलाधिकारी अल्मोड़ा के सांथ हमारी बैठक कराई जिसमें उन्होंने भी “कास्तकार महिलाओं की योजना” की बारीकियों को समझते हुए कि “फल-पौधों को in-situ विधि से यानि यथास्थान पर बीजू पौंधों को बिना उखाड़े उन्हें कलमी बनाया जायेगा, इन पौंधों की कीमत मय गड्डे-खाद-पानी एवं रख-रखाव आदि की मेहनत के बदले उन्हें सब्जियां, दालें, मसाले, औषधीय पौंध आदि उपलब्ध कराई जायेगी”, उक्त योजना को DPAP के तहत क्रियान्वयन हेतु भूमि संरक्षण विभाग को सौंपा. (संलग्न- अध्यक्ष परिषद, निदेशक उद्यान, SDM, DM को पत्रादि क्रमवार 26 to 33 देखें).

केवला नन्द “फ़कीर”

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